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2027 तक तकनीकी कंपनियों में काम करने वाले लोग AI के साथ मिलकर लगातार कार्य करेंगे

Published: January 14, 2026
2027 तक तकनीकी कंपनियों में काम करने वाले लोग AI के साथ मिलकर लगातार कार्य करेंगे

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# 2027 तक तकनीकी कंपनियों में काम करने वाले लोग AI के साथ मिलकर लगातार कार्य करेंगे

2027 तक तकनीकी कंपनियों में काम करने वाले लोग AI के साथ मिलकर लगातार कार्य करेंगे

**Published:** 1/14/2026

**Category:** technology

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मुंबई. भारतीय तकनीकी उद्योग में काम करने वाले HR नेताओं का मानना है कि आने वाले वर्षों में कार्यस्थल का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा. नासकॉम और Indeed के एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 97% HR विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2027 तक तकनीकी कंपनियों में काम करने वाले लोग AI के साथ मिलकर लगातार कार्य करेंगे और AI केवल सहायक उपकरण नहीं रहेगा. रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि वर्तमान में तकनीकी उद्योग में 20 से 40 प्रतिशत कार्य पहले से ही AI द्वारा संचालित हो रहा है.रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 45% प्रतिभागियों ने कहा कि अब सॉफ़्टवेयर विकास के 40% से अधिक कार्य AI द्वारा संभाले जा रहे हैं. नासकॉम की रिसर्च प्रमुख केतकी कर्निक का कहना है, “जैसे-जैसे AI अपनाया जाता है, कौशल और क्षमता निर्माण महत्वपूर्ण हो जाएगा ताकि प्रतिभा मूल्य श्रृंखला में आगे बढ़ सके और व्यवसायों के लिए सार्थक परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें.”रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि AI अब केवल सहायक उपकरण नहीं बल्कि रोज़मर्रा की भूमिकाओं, कार्यप्रवाह और निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बन रहा है. प्रतिभागियों ने उच्च-स्तरीय कार्यों जैसे परियोजना की परिधि निर्धारण, सिस्टम आर्किटेक्चर और डेटा मॉडल डिज़ाइन में मानव-AI सहयोग को सबसे प्रभावी बताया. वहीं, अधिक नियमित और दोहराए जाने वाले कार्य जैसे कोड जनरेशन और यूनिट टेस्ट बनाना आने वाले दो से तीन वर्षों में AI द्वारा स्वचालित किए जाने की संभावना है.रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि AI के उपयोग में अभी भी चुनौतियाँ हैं. आधे से अधिक HR नेताओं ने कहा कि AI के आउटपुट की गुणवत्ता या पूर्णता अक्सर कम होती है, इसलिए मानव निगरानी आवश्यक है. यही कारण है कि कंपनियां AI के साथ काम करते समय उच्च-स्तरीय कार्यों में मानव भागीदारी पर जोर दे रही हैं.इसके अलावा, कौशल आधारित भर्ती पर भी जोर दिया गया है. रिपोर्ट में कहा गया कि 85% प्रबंधक अब योग्यताओं के बजाय कौशल आधारित भर्ती को प्राथमिकता दे रहे हैं. 98% ने हाइब्रिड और बहु-आयामी कौशलों की आवश्यकता को प्रमुख माना. कंपनियों ने अपनी कार्य संरचना में AI-विशेष भूमिकाएँ शामिल कर कर्मचारियों को AI परियोजनाओं में विशेषज्ञ बनाने पर जोर दिया है. लगभग 79% संगठनों ने आंतरिक पुनः-प्रशिक्षण को प्रमुख रणनीति बनाया है.रिपोर्ट में हाइब्रिड कार्यशैली की दिशा में भी बदलाव देखने को मिला है. लगभग 80% कंपनियों में कर्मचारियों को सप्ताह में तीन या अधिक दिन कार्यालय में काम करने के लिए कहा गया है. इससे यह स्पष्ट होता है कि AI और मानव सहयोग का स्वरूप सिर्फ तकनीकी विकास तक सीमित नहीं है बल्कि संगठनात्मक संस्कृति और कार्य संरचना में भी इसका गहरा असर है.नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, AI के बढ़ते उपयोग ने कार्यस्थल की रणनीति को बदल दिया है. अब HR नेताओं का ध्यान केवल तकनीकी दक्षता पर नहीं बल्कि कर्मचारियों के कौशल और उनकी क्षमता पर भी है. यह बदलाव मानव-AI सहयोग को स्थायी रूप देने में सहायक होगा. AI अब केवल नियम आधारित कार्यों में सहायता नहीं करेगा बल्कि रणनीतिक निर्णय, डेटा विश्लेषण और डिज़ाइन जैसे उच्च मूल्य वाले कार्यों में मानवों के साथ मिलकर काम करेगा.रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि AI के उपयोग से संगठनिक कार्य कुशलता बढ़ रही है. 39% कंपनियां इंटेलिजेंट ऑटोमेशन में और 37% बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट में AI का उपयोग कर रही हैं. यह परिवर्तन न केवल उत्पादन प्रक्रिया को तेज कर रहा है बल्कि मानव श्रमिकों को उच्च मूल्य वाली भूमिकाओं में लाने में मदद कर रहा है.वर्तमान में, भारतीय तकनीकी उद्योग में HR नेताओं के दृष्टिकोण से AI सहयोग एक अनिवार्य पहलू बन गया है. संगठन अब कर्मचारियों को AI कौशल में प्रशिक्षित करने, नई भूमिकाओं की संरचना तैयार करने और हाइब्रिड कार्य वातावरण बनाने पर जोर दे रहे हैं. यह प्रवृत्ति भविष्य के कार्यस्थल को अधिक सहयोगात्मक, कुशल और रणनीतिक बनाने की दिशा में कदम है.रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट हुआ कि AI का व्यापक उपयोग केवल प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं है. यह संगठनों के कार्य ढांचे, कर्मचारियों के विकास और कौशल निर्माण को भी प्रभावित करेगा. AI आधारित कार्यस्थल में मानव और मशीन का सहयोग बढ़ने से उत्पादकता, नवाचार और निर्णय लेने की गुणवत्ता में सुधार होगा.कुल मिलाकर, नासकॉम-Indeed की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारतीय तकनीकी उद्योग में मानव-AI सहयोग केवल एक दूर का लक्ष्य नहीं है बल्कि 2027 तक यह कार्यस्थल का नया सामान्य बन जाएगा. कंपनियों को अपने कर्मचारियों को AI के साथ काम करने के लिए तैयार करना होगा, कौशल आधारित भर्ती और आंतरिक पुनः-प्रशिक्षण पर ध्यान देना होगा, और हाइब्रिड कार्य संस्कृति को अपनाना होगा. यह बदलाव कर्मचारियों और संगठनों दोनों के लिए लाभकारी साबित होगा और भारतीय तकनीकी क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को भी बढ़ाएगा.मानव और AI के बीच इस सहयोग से न केवल संगठनिक दक्षता बढ़ेगी बल्कि कर्मचारियों को उच्च मूल्य वाली भूमिकाओं में सशक्त बनाने का अवसर भी मिलेगा. विशेषज्ञों के अनुसार, 2027 तक AI और मानव का यह साझेदारी मॉडल भारतीय तकनीकी उद्योग की कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन जाएगा, जिससे कार्य की गुणवत्ता और कर्मचारियों की संतुष्टि दोनों में सुधार होगा.

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*This article was automatically generated and curated by our AI news platform.*

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